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     Sad quotes shayari in hindi

?जिंदगी देने वाले
मरता छोड़ गया
अपनापन जताने वाले तन्हा छोड़ गये
जब पड़ी जरूरत हमें अपने हमसफर की
वो जो साथ चलने वाले रास्ता मोड़ गये।?
वो तो दिवानी थी मुझे तन्हां छोड़ गई
खुद न रुकी तो अपना साया छोड़ गईदुख न सही गम इस बात का है
आंखो से करके वादा होंठो से तोड़ गई।?इंसान के कंधों पर ईंसान जा रहा था
कफ़न में लिपटा अरमान जा रहा था
जिन्हें मिली बे-वफ़ाई महोब्बत में
वफ़ा की तलाश में श्मशान जा रहा था।?ना पूछ मेरे सब्र की इंतहा कहाँ तक है
तू सितम कर ले
तेरी हसरत जहाँ तक है
वफ़ा की उम्मीद
जिन्हें होगी उन्हें होगी
हमें तो देखना है
तू बेवफ़ा कहाँ तक है।

?आग दिल में लगी जब वो खफ़ा हुए
महसूस हुआ तब
जब वो जुदा हुए
करके वफ़ा कुछ दे ना सके वो
पर बहुत कुछ दे गए जब वो बेवफ़ा हुए!?प्यार करने का हुनर हमें आता नहीं
इसीलिए हम प्यार की बाज़ी हार गएहमारी ज़िन्दगी से उन्हें बहुत प्यार था
शायद इसीलिए वो हमें ज़िंदा ही मार गए!

? हमनें अपनी साँसों पर उनका नाम लिख लिया
नहीं जानते थे कि हमनें कुछ गलत किया
वो प्यार का वादा करके हमसे मुकर गए
ख़ैर उनकी बेवाफाई से हमनें कुछ तो सबक लिया!?
आग दिल में लगी जब वो खफ़ा हुए
महसूस हुआ तब
जब वो जुदा हुएकरके वफ़ा कुछ दे ना सके वो
पर बहुत कुछ दे गए जब वो बेवफ़ा!? मत ज़िकर कीजिये मेरी अदा के बारे में
मैं बहुत कुछ जानता हूँ वफ़ा के बारे में
सुना है वो भी मोहब्बत का शोक़ रखते हैं
जो जानते ही नहीं वफ़ा के बारे में।

?

आपकी नशीली यादों में डूबकर
हमने इश्क की गहराई को समझा
आप तो दे रहे थे धोखा और
हमने जानकर भी कभी आपको बेवफा न समझा। ?
क्या बताऊँ मेरा हाल कैसा है
एक दिन गुज़रता है एक साल जैसा है
तड़पता हूँ इस कदर बेवफाई में उसकी
ये तन बनता जा रहा कंकाल जैसा है।.?

मेरी तक़दीर में जलना है तो जल जाऊँगा
तेरा वादा तो नहीं हूँ जो बदल जाऊँगा
मुझको समझाओ न मेरी जिंदगी के असूल
एक दिन मैं खुद ही ठोकर खा के संभल जाऊँगा।?मेरी तक़दीर में जलना है तो जल जाऊँगा
तेरा वादा तो नहीं हूँ जो बदल जाऊँगा
मुझको समझाओ न मेरी जिंदगी के असूल
एक दिन मैं खुद ही ठोकर खा के संभल जाऊँगा।?चाँद निकलेगा तो दुआ मांगेंगे
अपने हिस्से में मुकदर का लिखा मांगेंगे
हम तलबगार नहीं दुनिया और दौलत के
हम रब से सिर्फ आपकी वफ़ा मांगेंगे!? हम तो तेरे दिल की महफ़िल सजाने आए थे
तेरी कसम तुझे अपना बनाने आए थे
किस बात की सजा दी तुने हमको बेवफा
हम तो तेरे दर्द को अपना बनाने आए थे।?दो दिलों की धड़कनों में एक साज़ होता है
सबको अपनी-अपनी मोहब्बत पर नाज़ होता है
उसमें से हर एक बेवफा नहीं होता
उसकी बेवफ़ाई के पीछे भी कोई राज होता है!?हर धड़कन में एक राज़ होता है
बात को बताने का एक अंदाज़ होता है
जब तक ठोकर न लगे बेवाफ़ाई की
हर किसी को अपने प्यार पर नाज़ होता है।?

जनाजा मेरा उठ रहा था
फिर भी तकलीफ थी उसे आने में
बेवफा घर में बैठी पूछ रही थी
और कितनी देर है दफनाने में!

?उसके चेहरे पर इस कदर नूर था
कि उसकी याद में रोना
भी मंज़ूर था
बेवफ़ा भी नहीं कह सकते उसको फराज़
प्यार तो हमने किया है वो तो बेक़सूर था।?

ऐसा नहीं कि आप हमें याद नहीं आते
माना कि जहाँ के सब रिश्ते निभाये नहीं जाते
पर जो बस जाते हैं दिल में वो भुलाए नहीं जाते
बेवफाओं से हर तरह के रिश्ते निभाये नहीं जाते।

?वफाओं ​की बातें की हमने जफ़ाओं के सामने​
​ ​ ले चले हम चिराग़ हवाओं के सामने​
​ ​ उठे हैं जब भी हाथ बदली हैं क़िस्मतें​
​ मजबूर है ​खुदा भी दुआओं के सामने​।?​​ठुकरा के उसने मुझे कहा ​कि मुस्कुराओ
मैं हंस दिया सवाल उसकी ख़ुशी का था
मैंने खोया वो जो मेरा था ​ही नहीं
उसने खोया वो जो सिर्फ उसी का था।?  दिल किसी से तब ही लगाना
जब दिलों को पढ़ना सीख लो
वरना हर एक चेहरे की फितरत में
ईमानदारी नहीं होती।? मत बहा आंसुओं में जिंदगी को
एक नए जीवन का आगाज़ कऱ
दिखानी है अगर दुश्मनी की हद तो
ज़िक्र भी मत कर
नज़र अंदाज़ कर।

?वो बात ही कुछ अजीब थी
वो हमसे रूठ गयी
जो दिल के सबसे करीब थी
उसने तोड़ दिया दिल हमारा
और लोग कहते है वो लड़की बहुत सरीफ थी |? नहीं करती थी प्यार तो
मुझे बताया होता
गौर फरमाइएगा
नहीं करती थी प्यार तो
मुझे बताया होता
बुला के पार्क में यूं धोखे से अपने भाइयो से
तो ना पिटवाया होता।?

हमें न मोहब्बत मिली न प्यार मिला
हम को जो भी मिला बेवफा यार मिला! अपनी तो बन गई तमाशा ज़िन्दगी
हर कोई अपने मकसद का तलबगार मिला!? मैंने प्यार किया बड़े होश के साथ!

मैंने प्यार किया बड़े जोश के साथ!

पर हम अब प्यार करेंगे बड़ी सोच के साथ!

क्योंकि कल उसे देखा मैंने किसी और के साथ! ? कहती है दुनिया जिसे प्यार
नशा है
खताह है! हमने भी किया है प्यार
इसलिए हमे भी पता है!

मिलती है थोड़ी खुशियाँ ज्यादा गम!

पर इसमें ठोकर खाने का भी कुछ अलग ही मज़ा है!?उन्होंने जो किया ये शायद उनकी फितरत है!

अपने लिये तो प्यार एक इबादत है!

न मिले उनसे तो मरकर बता देंगे!

कि कितनी मुहब्बत है इस दिल में!?  प्यार किया था तो प्यार का अंजाम कहाँ मालूम था!

वफ़ा के बदले मिलेगी बेवफाई कहाँ मालूम था!

सोचा था तैर के पार कर लेंगे प्यार के दरिया को!

पर बीच दरिया मिल जायेगा भंवर कहाँ मालूम था!?  शायरी नहीं आती मुझे बस हाले दिल सुना रही हूँ
बेवफ़ाई का इलज़ाम है
मुझपर फिर भी गुनगुना रही हूँ
क़त्ल करने वाले ने कातिल भी हमें ही बना दिया
खफ़ा नहीं उससे फिर भी मैं बस
उसका दामन बचा रही हूँ।

?अगर दुनिया में जीने की चाहत ना होती
तो खुदा ने मोहब्बत बनाई ना होती
लोग मरने की आरज़ू ना करते
अगर मोहब्बत में बेवाफ़ाई ना होती!? जानकार भी तुम मुझे जान ना पाए
आजतक तुम मुझे पहचान ना पाए
खुद ही की है बेवाफाई तुमने
ताकि तुम पर इल्ज़ाम ना आए!

?मत पूछ मेरे सब्र की इन्तेहा कहाँ तक है
तु सितम कर ले
तेरी ताक़त जहाँ तक है
व़फा की उम्मीद जिन्हें होगी
उन्हें होगी
हमें तो देखना है
तू ज़ालिम कहाँ तक है!?  पल पल उसका साथ निभाते हम
एक इशारे पर दुनिया छोड़ जाते हम
समुन्दर के बीच में पहुंचकर फरेब किया उसने
वो कहता तो किनारे पर ही डूब जाते हम।?

वो छोड़ के गए हमें
न जाने उनकी क्या मजबूरी थी
खुदा ने कहा इसमें उनका कोई कसूर नहीं
ये कहानी तो मैंने लिखी ही अधूरी थी।
?  प्यार में बेवाफाई मिले तो गम न करना
अपनी आँखे किसी के लिए नम न करना
वो चाहे लाख नफरते करें तुमसे
पर तुम अपना प्यार कभी उसके लिए कम न करना।

?प्यार में बेवाफाई मिले तो गम न करना
अपनी आँखे किसी के लिए नम न करना
वो चाहे लाख नफरते करें तुमसे
पर तुम अपना प्यार कभी उसके लिए कम न करना।

?दुनियाँ को इसका चेहरा दिखाना पड़ा मुझे
पर्दा जो दरमियां था हटाना पड़ा मुझे
रुसवाईयों के खौफ से महफिल में आज
फिर इस बेवफा से हाथ मिलाना पड़ा मुझे।?तेरी दोस्ती ने दिया सकूं इतना
की तेरे बाद कोई अच्छा न लगे
तुझे करनी है बेवफ़ाई तो इस अदा से कर
कि तेरे बाद कोई भी बेवफ़ा न लगे।?  समेट कर ले जाओ अपने झूठे वादों के अधूरे क़िस्से
अगली मोहब्बत में तुम्हें फिर इनकी ज़रूरत पड़ेगी।? ​समझ जाते थे हम उनके दिल की हर बात ​को​
​ ​और ​वो हमें हर बार ​धोखा देते थे​
​ लेकिन हम भी मजबूर थे दिल के हाथों​
​ जो उन्हें बार​-​बार मौका देते थे​।?इंसानों के कंधे पर इंसान जा रहे हैं
कफ़न में लिपट कर कुछ अरमान जा रहे हैं
जिन्हें मिली मोहब्बत में बेवफ़ाई
वफ़ा की तलाश में वो कब्रिस्तान जा रहे हैं।? ​बेवफाई उसकी मिटा के आया हूँ
ख़त उसके पानी में बहा के आया हूँ
कोई पढ़ न ले उस बेवफा की यादों को
इसलिए पानी में भी आग लगा कर आया हूँ।?  ये देखा है हमने खुद को आज़माकर
धोखा देते हैं लोग करीब आकर
कहती है दुनिया पर दिल नहीं मानता
कि छोड़ जाओगे तुम भी एक दिन अपना बनाकार।? ​आग दिल में लगी जब वो खफा हुए
​ ​महसूस हुआ तब
​ ​जब वो जुदा हुए​
​​करके वफ़ा कुछ दे न सके वो​ ​​पर बहुत कुछ दे गए जब वो बेवफा हुए।

?​कहाँ से ​लाऊ हुनर उसे मनाने का​
​ कोई जवाब नहीं था उसके रूठ जाने का​
​ मोहब्बत में सजा मुझे ही मिलनी थी​
​ क्यूंकी जुर्म मैंने किया ​था ​उससे दिल लगाने का​।?  कदम यूँ ही डगमगा गए रास्ते में
वैसे संभालना हम भी जानते थे
ठोकर भी लगी तो उसी पत्थर से
जिसे हम अपना मानते थे।?  किया अपना बन कर जो तूने सनम
ना गैरों से वो कभी गैर करे
अगर हमें छोड़ कर जाना चाहते हो
जाओ चले जाओ अल्लाह खैर करे।? एक इंसान मिला जो जीना सिखा गयाआंसुओं की नमी को पीना सिखा गया
कभी गुज़रती थी वीरानों में ज़िंदगी
वो शख्स वीरानों में महफ़िल सजा गया।?महफ़िल ना सही
तन्हाई तो मिलती है
मिलें ना सही
जुदाई तो मिलती है
प्यार में कुछ नहीं मिलता
वफ़ा ना सही
बेवफ़ाई तो मिलती है।

?​यह ना थी हमारी क़िस्मत
कि विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते
यही इंतज़ार होता
तेरे वादे पर जाएँ हम
तो यह जान झूठ जाना
कि ख़ुशी से मर ना जाते
अगर ऐतबार होता।?
जब भी उनकी गली से गुज़रता हूँ
मेरी आंखें एक दस्तक दे देती हैं
दुःख ये नहीं कि वो दरवाजा बंद कर देते है
खुशी ये है कि वो मुझे अब भी पहचान लेते हैं।?मेरी मौत के सबब आप बनेइस दिल के रब आप बने
पहले मिसाल थे वफ़ा की
जाने यूँ बेवफ़ा कब आप बने।? एक तेरी खातिर परेशाँ हूँ मैं
टूटे दिलों की जुबाँ हूँ मैं
तूने ठुकराया जिसको अपनाकर
उसी दीवाने का गुमां हूँ मैं।?  खुदा तू ही बता हमारा क्या होगा
उजड़े हुए दिल का सहारा क्या होगा
घबराहट होती है मोहब्बत की नाव में बैठ कर
गर मझदार ये तो किनारा क्या होगा।?तुमको समझाता हूँ इसलिए ए दोस्त
क्योंकि सबको ही आज़मा चुका हूँ मैं
कहीं तुमको भी पछताना ना पड़े यहाँ
कई हसीनों से धोखा खा चुका हूँ मैं।

?बिखरे हुए दिल ने भी उसके लिए फरियाद मांगी
मेरी साँसों ने भी हर पल उसकी ख़ुशी मांगी
जाने क्या मोहब्बत थी उस बेवफ़ा में
कि मैंने आखिरी फरियाद में भी उनकी वफ़ा मांगी।

?मज़बूरी में जब कोई जुदा होता है
ज़रूरी नहीं कि वो बेवफ़ा होता है
देकर वो आपकी आँखों में आँसू
अकेले में वो आपसे ज्यादा  रोता है।? कभी हम भी इसके क़रीब थे​
​​दिलो जान से बढ़ कर अज़ीज थे​
​ ​​मगर आज ऐसे मिला है वो​
​ ​कभी पहले जैसे मिला ना हो​।?  ज़ख़्म जब मेरे सिने के भर जाएँगे
आँसू भी मोती बनकर बिखर जाएँगे
ये मत पूछना किस किस ने धोखा दिया
वरना कुछ अपनो के चेहरे उतर जाएँगे।

?चेहरों के लिए आईने कुर्बान किये है​
​​ इस शौक में अपने बड़े नुकसान किये है​
​​ महफ़िल में मुझे गालियाँ देकर है बहुत खुश​
​​ जिस शख्स पर मैंने बड़े एहसान किये है।?  जीने की तमन्ना बची कहाँ है
भुलाया जो है हमें आपने
यह तो बेवफ़ाई की हद ही है
जिसे पार किया था हमने।? फ़र्ज़ था जो मेरा निभा दिया मैंने
उसने माँगा वो सब दे दिया मैंने
वो सुनके गैरों की बातें बेवफ़ा हो गयी
समझ के ख्वाब उसको आखिर भुला दिया मैंने।

?वफ़ा पर हमने घर लुटाना था लेकिन
वफ़ा लौट गयी लुटाने से पहले
चिराग तमन्ना का जला तो दिया था
मगर बुझ गया जगमगाने से पहले।

?सब कुछ है मेरे पास पर दिल की दवा नहीं
दूर है वो मुझसे पर मैं उससे ख़फ़ा नहीं
मालूम है कि वो अब भी प्यार करता है मुझसे
वो थोड़ा सा ज़िद्दी है मगर बेवफ़ा नहीं।?  ना पूछ मेरे सब्र की इंतेहा कहाँ तक है
कर ले तू सितम
तेरी हसरत जहाँ तक है
वफ़ा की उम्मीद
जिन्हें होगी उन्हें होगी
हमें तो देखना है तू बेवफ़ा कहाँ तक है।

?कभी करीब तो कभी जुदा है तू
जाने किस-किस से खफा है तू
मुझे तो तुझ पर खुद से ज्यादा यकीं था
पर ज़माना सच ही कहता था कि बेवफ़ा है तू।?  हो गया हूँ मशहूर तो ज़ाहिर है दोस्तो
इलज़ाम सौ तरह के मेरे सर भी आयेंगे
थोड़ा सा अपनी चाल बदल कर चलो
सीधे चले तो मुमकिन है पीठ में खंज़र भी आयेंगे।?  ना जाने क्या सोच कर लहरें साहिल से टकराती हैं
और फिर समंदर में लौट जाती हैं
समझ नहीं आता कि किनारों से बेवफाई करती हैं
या फिर लौट कर समंदर से वफ़ा निभाती हैं।?हर पल कुछ सोचते रहने की आदत हो गयी है
हर आहट पे चौंक जाने की आदत हो गयी है
तेरे इश्क़ में ऐ बेवफा
हिज्र की रातों के संग
हमको भी जागते रहने की आदत हो गयी है।?  वो पानी की लहरों पे क्या लिख रहा था
खुदा जाने हरफ-ऐ-दुआ लिख रहा था
महोब्बत में मिली थी नफरत उसे भी शायद
इसलिए हर शख्स को शायद बेवफा लिख रहा था।?  मशहूर हो गया हूँ तो ज़ाहिर है दोस्तो
इलज़ाम सौ तरह के मेरे सर भी आयेंगे
थोड़ा सा अपनी चाल बदल कर चलो
सीधे चले तो मुमकिन है पीठ में खंज़र भी आयेंगे।? .वफ़ा करने से मुकर गया है दिल
अब प्यार करने से डर गया है दिल
अब किसी सहारे की बात मत करना
झूठे दिलासों से भर गया है अब यह दिल।?जानते थे कि नहीं हो सकते कभी तुम हमारे
फिर भी खुदा से तुम्हें माँगने की आदत हो गयी
पैमाने वफ़ा क्या है
हमें क्या मालूम
कि बेवफाओं से दिल लगाने की आदत हो गयी।

?ज़िन्दगी से बस यही गिला है
ख़ुशी के बाद क्यों ये गम मिला है
हमने तो उनसे वफ़ा की थी
पर नहीं जानते थे कि बेवफाई ही वफ़ा का सिला है।? जाने मेरी आँखों से कितने आँसू बह गए
इंसानो की इस भीड़ में देखो हम तनहा रह गए
करते थे जो कभी अपनी वफ़ा की बातें
आज वही सनम हमें बेवफ़ा कह गए।?  आग दिल में लगी जब वो खफा हुए
महसूस हुआ तब
जब वो जुदा हुए
करके वफ़ा कुछ दे ना सकें वो
पर बहुत कुछ दे गए जब वो बेवफा हुए।?
तेरी चौखट से सिर उठाऊं तो बेवफा कहना
तेरे सिवा किसी और को चाहूँ तो बेवफा कहना
मेरी वफाओं पे शक है तो खंजर उठा लेना
शौंक से मर ना जाऊं तो बेवफा कहना।?महफ़िल में कुछ तो सुनाना पड़ता है
ग़म छुपा कर मुस्कुराना पड़ता है
कभी हम भी उनके अज़ीज़ थे
आज-कल ये भी उन्हें याद दिलाना पड़ता है।?  कोई भी नहीं यहाँ पर अपना होता
इस दुनिया ने ये सिखाया है हमको
उसकी बेवफाई  का ना चर्चा करना
आज दिल ने ये समझाया है हमको? ज़िंदगी से बस यही एक गिला है
ख़ुशी के बाद न जाने क्यों गम मिला है
हमने तो की थी वफ़ा उनसे जी भर के
पर नहीं जानते थे कि वफ़ा के बदले बेवफाई ही सिला है।

?कभी करीब तो कभी जुदा था तू
जाने किस-किस से ख़फ़ा है तू
मुझे तो तुझ पर खुद से ज्यादा यकीन था
पर ज़माना सच ही कहता था कि बेवफ़ा है तू।?

वो निकल गए मेरे रास्ते से इस कदर कि
जैसे कि वो मुझे पहचानते ही नहीं
कितने ज़ख्म खाए हैं मेरे इस दिल ने
फिर भी हम उस बेवफ़ा को बेवफ़ा मानते ही नहीं।? उनकी मोहब्बत के अभी निशान बाकी है
नाम लब पर है और जान बाकी है
क्या हुआ अगर देख कर मुँह फेर लेते हैं
तसल्ली है कि शक्ल की पहचान बाकी है।?  एक ख़ुशी की चाह में हर ख़ुशी से दूर हुए हम
किसी से कुछ कह भी ना सके इतने मज़बूर हुए हम
ना आई उन्हें निभानी वफ़ा इस दौर-ए-इश्क़ में
और ज़माने की नज़र में बेवफ़ा के नाम से मशहूर हुए हम।

?एक बार रोये तो रोते चले गए
दामन अश्कों से भिगोते चले गए
जब जाम मिला बेवफाई का तो
खुद को पैमाने में डुबोते चले गए।?हर पल कुछ सोचते रहने की आदत गयी है
हर आहट पे च चौंक जाने की आदत हो गयी है
तेरे इश्क़ में ऐ बेवफा
हिज्र की रातों के संग
हमको भी जागते रहने की आदत हो गयी है।?  तेरे इश्क़ ने दिया सुकून इतना
कि तेरे बाद कोई अच्छा न लगे
तुझे करनी है बेवफाई तो इस अदा से कर
कि तेरे बाद कोई बेवफ़ा न लगे।? कभी ग़म तो कभी तन्हाई मार गयी
कभी याद आ कर उनकी जुदाई मार गयी
बहुत टूट कर चाहा जिसको हमने
आखिर में उनकी ही बेवफाई मार गयी।?जो ज़ख्म दे गए हो आप मुझे
ना जाने क्यों वो ज़ख्म भरता नहीं
चाहते तो हम भी हैं कि आपसे अब न मिलें
मगर ये जो दिल  है कमबख्त कुछ समझता ही नहीं।? रह न पाओगे भुला कर देख लो,
यकीं न आये तो आजमा कर देख लो,
हर जगह महसूस होगी मेरी कमी,
अपनी महफ़िल को कितना भी सजा कर देख लो।?  तेरी आँखों में जब से मैंने
अपना अक्स देखा है,
मेरे चेहरे को कोई आइना
अच्छा नहीं लगता।? अपने पैरों के निशान को,
वो भी अधूरे लगते हैं…
तेरे साथ के बिना।?  आ जाओ लहराती इठलाती हुई,
तुम इन हवाओं की तरह! मौसम ये बहुत बेदर्द है,
तुझे मेरे दिल से पुकारा है!!

?मेरा कत्ल करने की उसकी साजीश तो देखो……

करीब से गुज़री तो चेहरे से पर्दा हटा लिया?   तेरे प्यार का सिला हर हाल में देंगे,
खुदा भी मांगे ये दिल तो टाल देंगे,
अगर दिल ने कहा तुम बेवफ़ा हो,
तो इस दिल को भी सीने से निकाल देंगे? उल्फत का अक्सर यही दस्तूर होता है,
जिसे चाहो वही अपने से दूर होता है,
दिल टूटकर  बिखरता है इस कदर,
जैसे कोई कांच का खिलौना चूर चूर होता है!

?एक दिन हम आपसे इतने दूर हो जायेंगे,
के आसमान के इन तारो में कही खो जायेंगे,
आज मेरी परवाह नहीं आपको,
पर देखना    दिन हद से ज्यादा.. हम आपको यादआएंगे!!

?रोज़ आता है मेरे
दिल को तस्सली देने
ख़याल ऐ यार को
मेरा खयाल कितना है. ? हर सितम सह कर कितने ग़म छिपाये हमने,
तेरी खातिर हर दिन आँसू बहाये हमने,
तू छोड़ गया जहाँ हमें राहों में अकेला,
बस तेरे दिए ज़ख्म हर एक से छिपाए हमने.

?वफ़ा पर हमने घर लुटाना था लेकिन,
वफ़ा लौट गयी लुटाने से पहले,
चिराग तमन्ना का जला तो दिया था,
मगर बुझ गया जगमगाने से पहले.?   तूने नफ़रत से जो देखा है तो याद आया,
कितने रिश्ते तेरी ख़ातिर यूँ ही तोड़ आया हूँ,
कितने धुंधले हैं ये चेहरे जिन्हें अपनाया है,
कितनी उजली थी वो आँखें जिन्हें छोड़ आया हूँ?  इस दिल को किसी की आहट की आस रहती है,
निगाह को किसी सूरत की प्यास रहती है,
तेरे बिना जिन्दगी में कोई कमी तो नही,
फिर भी तेरे बिना जिन्दगी उदास रहती है.

?मेरा इल्ज़ाम है तुझ पर कि तू बेवफा था;
दोष तो तेरा था मगर तू हमेशा ही खफा था;
ज़िन्दगी की इस किताब में बयान है तेरी मेरी कहानी;
यादों से सराबोर उसका एक एक सफा था।? भुला के मुझको अगर तुम भी हो सलामत;
तो भुला के तुझको संभलना मुझे भी आता है;
नहीं है मेरी फितरत में ये आदत वरना;
तेरी तरह बदलना मुझे भी आता है।

?उनकी ना थी खता, हम ही कुछ गलत
समझ बैठे यारो….
वो मुहब्बत से बात करते थे, तो हम मुहब्बत
समझ बैठे ….!

?

क्या अजीब सी ज़िद है..
हम दोनों की,
तेरी मर्ज़ी हमसे जुदा होने की..
और मेरी तेरे पीछे तबाह होने की..

?तेरी दोस्ती ने दिया सकूं इतना,
की तेरे बाद कोई अच्छा न लगे,
तुझे करनी है बेवफ़ाई तो इस अदा से कर,
कि तेरे बाद कोई भी बेवफ़ा न लगे?  कोई हुनर, कोई राज,
कोई रविश, कोई तो तरीका बताओ
दिल टूटे भी ना, साथ छूटे भी ना,
कोई रुठे भी ना और जिदंगी गुजर जाए..

?दुनिया में किसी से कभी प्यार मत करना,
अपने अनमोल आँसू इस तरह बेकार मत करना,
कांटे तो फिर भी दामन थाम लेते हैं,
फूलों पर कभी इस तरह तुम ऐतबार मत करना..?

अपनी खुशीयां लुटा कर उसपर कुर्बान हो जाऊ,
काश कुछ दिन उसके शहर का मेहमान हो जाऊ,
वो अपना नायाब दिल मुझको देदे,
और फिर वापस मांगे, मैं मुकर जाऊ और बेईमान हो जाऊ..? मेरे खवाबो मे आना आपका कसूर था,
आपसे दिल लगाना हमारा कसूर था,
आप आए थे जिन्दगी मे पल दो पल के लिए,
आपको जिन्दगी समझ लेना हमारा कसूर था..?   ताज्जुब है तेरी गहरी मुहब्बत पर,
तू हमारी रूह में, और हम तेरे वहम ओ गुमान में भी नही.

?दर्द  है दिल में पर इसका एहसास नहीं होता;
रोता है दिल जब वो पास नहीं होता;
बर्बाद हो गए हम उसके प्यार में;
और वो कहते हैं इस तरह प्यार नहीं होता

?वो बेवफा हमारा इम्तेहा क्या लेगी…
मिलेगी नज़रो से नज़रे तो अपनी नज़रे ज़ुका लेगी…
उसे मेरी कबर पर दीया मत जलाने देना…
वो नादान है यारो… अपना हाथ जला लेगी

?कदम कदम पर बहारो ने साथ छोडा,
जरुरत पडने पर यारो ने साथ छोडा,
बादा किया सितारोँ ने साथ निभाने का,
सुबह होने सितारो ने साथ छोडा.?  हमने भी किसी से प्यार किया था,
हाथो मे फूल लेकर इंतेज़ार किया था,
भूल उनकी नही भूल तो हमारी थी,
क्यों की उन्हो ने नही, हमने उनसे प्यार किया था..!!

?वो हमें भूल भी जायें तो कोई गम नहीं,
जाना उनका जान जाने से भी कम नहीं,
जाने कैसे ज़ख़्म दिए हैं उसने इस दिल को,
कि हर कोई कहता है कि इस दर्द  की कोई मरहम नहीं।

 

?आग दिल में लगी जब वो खफ़ा हुए,
महसूस हुआ तब, जब वो जुदा हुए,
करके वफ़ा कुछ दे ना सके वो,
पर बहुत कुछ दे गए जब वो बेवफ़ा हुए!? उसके चले जाने के बाद..
हम महोबत नहीं करते किसी से..
छोटी सी जिन्दगी है..
किस किस को अजमाते रहेंगे

?टूटे हुए प्याले में जाम नहीं आता
इश्क़ में मरीज को आराम नहीं आता
ये बेवफा दिल तोड़ने से पहले ये सोच तो लिया होता
के टुटा हुआ दिल किसी के काम नहीं आता?

Write by – Vijay singh

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