Gila shikwa shayari in hindi

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इंतज़ार करते करते वक़्त क्यों गुजरता नहीं
सब हैं यहाँ मगर कोई अपना नहीं
दूर नहीं पर फिर भी वो पास नहीं
है दिल में कहीं पर आँखों से दूर कहीं

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हर शाम कह जाती है एक कहानी
हर सुबह ले आती है एक नई कहानी
रास्ते तो बदलते है हर दिन लेकिन
मंजिल रह जाती है वही पुरानी

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तरसते थे जो मिलने को हमसे कभी
आज वो क्यों मेरे साए से कतराते हैं
हम भी वही हैं दिल भी वही है
न जाने क्यों लोग बदल जाते हैं

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अपनी तकदीर में तो कुछ ऐसे ही सिलसिले लिखे हैं
किसी ने वक़्त गुजारने के लिए अपना बनाया
तो किसी ने अपना बनाकर वक़्त गुजार लिय

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तकदीर बनाने वाले तूने भी हद कर दी
तकदीर में किसी और का नाम लिखा था
और दिल में चाहत किसी और की भर दी

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भूल गए या भुलाना चाहते हो
दूर कर दिया या जाना चाहते हो
आजमा लिया या आजमाना चाहते हो
मैसेज कर रहे हो या अभी और पैसे बचाना चाहते ह

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इन आंखो मे आंसू आये न होते
अगर वो पीछे मुडकर मुस्कुराये न होते
उनके जाने के बाद बस येही गम रहेगा
कि काश वो हमारी ज़िन्दगी मे दूबारा आये न होते

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फलक से चाँद उतारा गया
मेरी आस का एक सहारा गया
मैं दो बूँद पानी तरसती रह
मेरे होंठों से ज़हर गुज़ारा गया

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हमें उनसे कोई शिकायत नही
शायद हमारी किस्मत में चाहत नही
मेरी तकदीर को लिखकर तो ऊपर वाला भी मुकर गय
पूछा तो कहा ये मेरी लिखावट नही

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हमें उनसे कोई सिकायत नही
शायद हमारी किस्मत में चाहत नही
मेरी तकदीर को लिखकर तो ऊपर वाला भी मुकर गय
पूछा तो कहा ये मेरी लिखावट नहीं

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एक सिलसिले की उम्मीद थी जिनसे
वही फ़ासले बनाते गये
हम तो पास आने की कोशिश में थे
ना जाने क्यूँ वो हमसे दूरियाँ बढ़ाते गये

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खुदा जाने प्यार का दस्तूर क्या होता है
जिन्हें अपना बनाया वो न जाने क्यों दूर होता है
कहते हैं कि मिलते नहीं ज़मीन आसमान
फिर न जाने क्यूँ आसमान ज़मीन का सरूर होता है

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शिकायत है उन्हें कि हमें मोहब्बत करना नही आता
शिकवा तो इस दिल को भी है
पर इसे शिकायत करना नहीं आता

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दीवाने तेरे है इस बात से इनकार नहीं
कैसे कहें कि हमें आपसे प्यार नहीं
कुछ तो कसूर है आपकी निगाहों का
हम अकेले तो गुनेहगार नहीं

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नज़र चाहती है दीदार करना
दिल चाहता है प्यार करना
क्या बतायें इस दिल का आलम
नसीब में लिखा है इंतजार करना

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उल्फत में अक्सर ऐसा होता है
आँखे हंसती हैं और दिल रोता है
मानते हो तुम जिसे मंजिल अपनी
हमसफर उनका कोई और होता है

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मुझे सता के वो मेरी दुआएं लेता है
उसे खबर है कि मुझे बद्दुआ नहीं आती
सब कुछ सौप दिया उसे हमने
फिर भी वो कहता है, हमें वफा नहीं आती

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हमने सोचा कि सिर्फ हम ही उन्हें चाहते हैं
मगर उनके चाहने वालों का तो काफ़िला निकल
मैंने सोचा कि शिकायत करू खुदा स
मगर वह भी उनके चाहने वालों में निकला

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वादा करके वो निभाना भूल जाते हैं
लगा कर आग फिर वो बुझाना भूल जाते हैं
ऐसी आदत हो गयी है अब तो उस हरजाई की
रुलाते तो हैं मगर मनाना भूल जाते हैं

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सब फ़साने हैं दुनियादारी के
किस से किस का सुकून लूटा है
सच तो ये है कि इस ज़माने में
मैं भी झूठा हूँ तू भी झूठा है

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ज़िंदा रहे तो क्या ह जो मर जायें हम तो क्या
दुनिया से ख़ामोशी से गुज़र जायें हम तो क्या
हस्ती ही अपनी क्या है ज़माने के सामने
एक ख्वाब हैं जहान में बिखर जायें हम तो क्या

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किया है प्यार जिसे हमने ज़िन्दगी की तरह
वो आशना भी मिला हमसे अजनबी की तरह
किसे ख़बर थी बढ़ेगी कुछ और तारीकी
छुपेगा वो किसी बदली में चाँदनी की तरह

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गर्मिये हसरत-ए-नाकाम से जल जाते हैं
हम चिरागों की तरह शाम से जल जाते हैं
शमा जलती है जिस आग में नुमाइश के लि
हम उसी आग में गुमनाम से जल जाते हैं
जब भी आता है तेरा नाम मेरे नाम के साथ
जाने क्यों लोग मेरे नाम से जल जाते हैं

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वादा करके निभाना भूल जाते हैं
लगा कर आग फिर वो बुझाना भूल जाते हैं
ऐसी आदत हो गयी है अब तो सनम की
रुलाते तो हैं मगर मनाना भूल जाते हैं

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कभी उसने भी हमें चाहत का पैगाम लिखा था
सब कुछ उसने अपना हमारे नाम लिखा था
सुना है आज उनको हमारे जिक्र से भी नफ़रत है
जिसने कभी अपने दिल पर हमारा नाम लिखा था

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वक़्त बदलता है ज़िन्दगी के साथ
ज़िन्दगी बदलती है वक़्त के साथ
वक़्त नहीं बदलता अपनों के साथ
बस अपने बदल जाते हैं वक़्त के साथ

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मेरा इल्ज़ाम है तुझ पर कि तू बेवफा था
दोष तो तेरा था मगर तू हमेशा ही खफा था
ज़िन्दगी की इस किताब में बयान है तेरी मेरी कहानी
यादों से सराबोर उसका एक एक सफा था

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कदम कदम पे बहारों ने साथ छोड़ दिया
पड़ा जब वक़्त तब अपनों ने साथ छोड़ दिया
खायी थी कसम इन सितारों ने साथ देने की
सुबह होते देखा तो इन सितारों ने साथ छोड़ दिया

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से रोये मगर होंठो से मुस्कुरा बेठे
यूँ ही हम किसी से वफ़ा निभा बेठे
वो हमे एक लम्हा न दे पाए अपने प्यार का
और हम उनके लिये जिंदगी लुटा बेठे

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मोहब्बत नहीं है कोई किताबों की बात
समझोगे जब रो कर कुछ काटोगे रातें
जो चोरी हो गया तो पता चला दिल था हमारा
करते थे हम भी कभी किताबों की बात

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इस कदर हम यार को मनाने निकले
उसकी चाहत के हम दिवाने निकले
जब भी उसे दिल का हाल बताना चाहा
उसके होठों से वक़्त न होने के बहाने निकल

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एक अजनबी से मुझे इतना प्यार क्यों है
इंकार करने पर चाहत का इकरार क्यों है
उसे पाना नहीं मेरी तकदीर में शायद
फिर भी हर मोड़ पर उसी का इन्तज़ार क्यों है

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मानते हैं सारा जहाँ तेरे साथ होगा
खुशी का हर लम्हा तेरे पास होगा
जिस दिन टूट जाएँगी साँसे हमारी
उस दिन तुझे हमारी कमी का एहसास होगा

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ज़ख़्म देने की आदत नहीं हमको
हम तो आज भी वो एहसास रखते हैं
बदले बदले से तो आप हैं जनाब
जो हमारे अलावा सबको याद रखते हैं

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रास्ते में पत्थरों की कमी नहीं है
मन में टूटे सपनो की कमी नहीं है
चाहत है उनको अपना बनाने की मगर
मगर उनके पास अपनों की कमी नहीं है

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वो भूल गए कि उन्हें हसाया किसने था
जब वो रूठे थे तो मनाया किसने था
वो कहते हैं वो बहुत अच्छे है शायद
वो भूल गए कि उन्हें यह बताया किसने था

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कहाँ से लाऊँ हुनर उसे मनाने का
कोई जवाब नहीं था उसके रूठ जाने का
मोहब्बत में सजा मुझे ही मिलनी थी
क्योंकि जुर्म मेरा था उनसे दिल लगाने का

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उन्हें एहसास हुआ है इश्क़ का हमें रुलाने के बाद
अब हम पर प्यार आया है दूर चले जाने के बाद
क्या बताएं किस कदर बेवफ़ा है यह दुनिया
यहाँ लोग भूल जाते ही किसी को दफनाने के बाद

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मोहब्बत का मेरा यह सफर आख़िरी है
ये कागज, ये कलम, ये गजल आख़िर है
फिर ना मिलेंगे अब तुमसे हम कभी
क्योंकि तेरे दर्द का अब ये सितम आख़िरी है

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ना जाने कौन सी बात पर वो रूठ गयी है
मेरी सहने की हदें भी अब टूट गयी हैं
कहती थी जो कि कभी नहीं रूठेगी मुझसे
आज वो अपनी ही बातें भूल गयी ह

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मुद्दत से कोई शख्स रुलाने नहीं आया
जलती हुई आँखों को बुझाने नहीं आया
जो कहता था कि रहेंगे उम्र भर साथ तेरे
अब रूठे हैं तो कोई मनाने नहीं आया

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तुम ने चाहा ही नहीं हालात बदल सकते थे
तेरे आाँसू मेरी आँखों से निकल सकते थे
तुम तो ठहरे रहे झील के पानी की तरह
दरिया बनते तो बहुत दूर निकल सकते थे

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दस्तूर-ए-उल्फ़त वो निभाते नहीं है
जनाब महफ़िल में आते ही नहीं हैं
हम सजाते हैं महफ़िल हर शाम
एक वो हैं जो कभी तशरीफ़ लाते ही नहीं हैं

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आग से सीख लिया हम ने यह करीना भी
बुझ भी जाना पर बड़ी देर तक सुलगते रहना
जाने किस उम्र में जाएगी यह आदत अपनी
रूठना उससे और औरों से उलझते रहना

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दर्द ही सही मेरे इश्क़ का इनाम तो आया
खाली ही सही होठों तक जाम तो आया
मैं हूँ बेवफा सबको बताया उसने
यूँ ही सही चलो उसके लबों पर मेरा नाम तो आया

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ज़िंदगी से चले हैं अब इल्ज़ाम लेकर
बहुत जी चुके हैं अब उनका नाम लेकर
अकेले बातें करेंगे अब वो इन सितारों से
अब चले जायेंगे उन्हें यह सारा आसमान देकर

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जब प्यार नहीं है तो भुला क्यों नहीं देते
ख़त किसलिए रखे हैं जला क्यों नहीं देते
किस वास्ते लिखा है हथेली पे मेरा नाम
मैं हर्फ़ ग़लत हूँ तो मिटा क्यों नहीं देते

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भुला के मुझको अगर तुम भी हो सलामत
तो भुला के तुझको संभलना मुझे भी ता है
नहीं है मेरी फितरत में ये आदत वरना
तेरी तरह बदलना मुझे भी आता है

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ज़िंदगी हमारी यूँ सितम हो गयी
ख़ुशी ना जाने कहाँ दफ़न हो गयी
बहुत लिखी खुदा ने लोगों की मोहब्बत
जब आयी हमारी बारी तो स्याही ही ख़त्म हो गयी

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मोहब्बत मुक़द्दर है एक ख्वाब नहीं
ये वो अदा है जिसमे सब कामयाब नहीं
जिन्हें पनाह मिली उन्हें उँगलियों पर गिन ल
मगर जो फना हुए उनका कोई हिसाब नहीं

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सपना हैं आँखों में मगर नींद नहीं है
दिल तो है जिस्म में मगर धड़कन नहीं है
कैसे बयाँ करें हम अपना हाल-ए-दिल
जी तो रहें हैं मगर ये ज़िंदगी नहीं है

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मंजिल भी उसकी थी, रास्ता भी उसका था
एक मैं अकेला था, बाकी काफिला भी उसका था
साथ-साथ चलने की सोच भी उसकी थी
फ़िर रास्ता बदलने का फ़ैसला भी उसका था

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तुझसे दोस्ती करने का हिसाब ना आया
मेरे किसी भी सवाल का जवाब ना आया
हम तो जागते रहे तेरे ही ख्यालों में
और तुझे सो कर भी हमारा ख्वाब ना आया

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वो रास्ते में पलटा तो रुक गया मैं भी
फिर कदम, कदम न रहे, सफर, सफर न रहा
नज़रों से गिराया उसको कुछ इस तरह हम ने
कि वो खुद अपनी नज़रों में मुताबिर न रहा

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किसी के दिल में बसना कुछ बुरा तो नही
किसी को दिल में बसाना कोई खता तो नही
गुनाह हो यह ज़माने की नजर में तो क्या
यह ज़माने वाले कोई खुदा तो नही

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अपना समझा तो कह दिया वरना
गैरों से तो कोई गिला नहीं होत
कुछ न कुछ पहले खोना पड़ता ह
मुफ्त में तो कोई तज़ुर्बा नहीं मिलत

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हकीक़त कहो तो उनको ख्वाब लगता है
शिकायत करो तो उनको मजाक लगता है
कितनी शिद्दत से उन्हें याद करते हैं हम
और एक वो हैं जिन्हें ये सब इत्तेफाक लगता है

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मिला वो भी नहीं करते, मिला हम भी नहीं करते
वफ़ा वो भी नहीं करते, वफ़ा हम भी नहीं करते
उन्हें रुस्वाई का दुःख, हमें तन्हाई का दर्द
गिला वो भी नहीं करते शिकवा हम भी नहीं करते

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एक ग़ज़ल तेरे लिए ज़रूर लिखूंगा
बे-हिसाब उस में तेरा कसूर लिखूंगा
टूट गए बचपन के तेरे सारे खिलौने
अब दिलों से खेलना तेरा दस्तूर लिखूंगा

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कोई जुदा हो गया कोई ख़फ़ा हो गया
यह दुनिया के लोगों को क्या हो गया
जिस सजदे में मुझे उस को माँगना था रब से
अफ़सोस वही सजदा क़ज़ा हो गया।

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तुझे मोहब्बत करना नहीं आता
मुझे मोहब्बत के सिवा कुछ और नहीं आता
ज़िन्दगी गुजारने के बस दो ही तरीके हैं
एक तुझे नहीं आता और एक मुझे नहीं आता

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तूने नफ़रत से जो देखा है तो याद आया
कितने रिश्ते तेरी ख़ातिर यूँ ही तोड़ आया हू
कितने धुंधले हैं ये चेहरे जिन्हें अपनाया
कितनी उजली थी वो आँखें जिन्हें छोड़ आया हू

♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦

सजा लबों से अपने सुनाई तो होती
रूठ जाने की वजह बताई तो होती
बेच देता मैं खुद को तुम्हारे लिए
कभी खरीदने की चाहत जताई तो होत

♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦

एक दिन हम तुम से दूर हो जायेंगे
अंधेरी गलियों में यूं ही खो जायेंगे
आज हमारी फिक्र नहीं है आपको
कल से हम भी बेफिक्र हो जायेंगे

♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦

मेरे प्यार को बहकावा समझ लिया उन्होंने
मेरे एहसास को पछतावा समझ लिया उन्होंने
मैं रोती रही उनकी याद में पर हुआ ये क
मुझे ही बेवफ़ा समझ लिया उन्होंन

♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦

रात क्या ढली सितारे चले गए
गैरों से क्या शिकायत जब हमारे चले गए
जीत सकते थे हम भी इश्क़ की बाज़ी
पर उनको जिताने की धुन में हम हारे चले गए

♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦

दिलों को खरीदने वाले लोग हज़ार मिल जायेंगे
तुमको दगा देने वाले बार-बार मिल जायेंगे
मिलेगा न हमें तुम जैसा कोई
मिलने को तो लोग हमें बेशुमार मिल जायेंगे

♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦

उनके होंठों पे मेरा नाम जब आया होगा
ख़ुद को रुसवाई से फिर कैसे बचाया होगा
सुन के फ़साना औरों से मेरी बर्बादी का
क्या उनको अपना सितम न याद आय होगा

♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦

मोहब्बत से वो देखते हैं सभी को
बस हम पर कभी ये इनायत नहीं होती
मैं तो शीशा हूँ टूटना मेरी फ़ितरत है
इसलिए मुझे पत्थरों से कोई शिकायत नहीं होती

♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦

जो आँसू दिल में गिरते हैं वो आँखों में नहीं रहते
बहुत से हर्फ़ ऐसे हैं जो लफ़्ज़ों में नहीं रहते
किताबों में लिखे जाते हैं दुनिया भर के अफ़साने
मगर जिन में हक़ीक़त हो वो किताबों में नहीं रहते

♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦

कोई उम्मीद बर नहीं आती​
​कोई सूरत नज़र नहीं आती
​​मौत का एक दिन मु’अय्यन
​नींद क्यों रात भर नहीं आती​

♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦

दिल से मिले दिल तो सजा देते है लोग​
​प्यार के जज्बातों को डुबा देते है लोग
​दो इँसानो को मिलते कैसे देख सकते है
जब साथ बैठे दो परिन्दो को भी उठा देते है लोग

♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦

कम से कम ​तन्हाई तो साथी है​
अपनी ​जिंदगी के हर एक पल की
चलो ये शिकवा भी दूर हुआ कि
किसी ने साथ नहीं दिया

♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦

​कहने वालों का कुछ नहीं जाता
सहने वाले कमाल करते है
कौन ढूंढें जवाब दर्दों के
लोग तो बस सवाल करते ह

♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦

इंतजार किस पल का किये जाते हो यारों
प्यासों के पास समंदर नही आने वाला
लगी है प्यास ​तो ​चलो रेत निचोड़ी जाए
अपने हिस्से में समंदर नहीं आने वाला

♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦

तेरी नज़रों से दूर जाने के लिए तैयार तो थे हम
फिर इस तरह, नज़रें घुमाने की जरूरत क्या थी
तेरे एक इशारे पे, हम इल्जाम भी अपने सिर ले लेते​
फिर बेवजह, झूठे इल्जाम लगाने की जरुरत क्या थ

♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦

समझा न कोई हमारे दिल की बात को
दर्द दुनिया ने बिना सोचे ही दे दिया
जो सह गए हर दर्द को हम चुपके से
तो हमको ही पत्थर दिल कह दिया

♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦

दुनिया ने हम पे जब कोई इल्ज़ाम रख दिया
हमने मुक़ाबिल उसके तेरा नाम रख दिया
इक ख़ास हद पे आ गई जब तेरी बेरुख़ी
नाम उसका हमने गर्दिशे-अय्याम रख दिया

♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦

तुम आज हँसते हो हंस लो मुझ पर ये आज़माइश ना बार-बार होगी
मैं जानता हूं मुझे ख़बर है कि कल फ़ज़ा ख़ुशगवार होगी
रहे मोहब्बत में ज़िन्दगी भर, रहेगी ये कशमकश बराबर
ना तुमको कुर्बत में जीत होगी ना मुझको फुर्कत में हार होगी
हज़ार उल्फ़त सताए लेकिन मेरे इरादों से है ये मुमकिन
अगर शराफ़त को तुमने छेड़ा तो ज़िन्दगी तुम पे वार होगी

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